— प्रेरणा — हम जिंदगी के किसी भी मोड़ पर हों, अक्सर कुछ लोग ऐसे मिल जाते हैं जिन्हें देखकर दिल से महसूस होता है कि भविष्य में मुझे भी इनके जैसा बनना है। उनका जीवन स्तर, उनका संघर्ष, उनका आत्मविश्वास, और कठिनाइयों में भी मुस्कुराते रहना हमें भीतर तक छू जाता है। हमें महसूस होता है कि सफलता केवल ऊंचे पदों से नहीं बल्कि जज़्बे, मेहनत और अच्छे आचरण से भी तय होती है। यह जरूरी नहीं है कि हमारे प्रेरणा स्रोत कोई प्रसिद्ध सेलिब्रिटी हों। कई बार एक साधारण सा इंसान भी अपने व्यवहार, संघर्ष और सकारात्मक सोच के जरिए हमारे लिए गहरी प्रेरणा बन जाता है। उनका सादगी भरा जीवन, सच्चाई के साथ संघर्ष करते रहना, और सपनों के प्रति समर्पण हमें बहुत कुछ सिखा जाता है। जब हम किसी को अपना प्रेरणा स्रोत मानते हैं, तो अनजाने में हम खुद को भी बेहतर बनाने की दिशा में कदम बढ़ाने लगते हैं। उनका जीवन हमारे लिए एक दर्पण बन जाता है जिसमें हम अपने भविष्य की संभावनाएं देखने लगते हैं। हम ...
विशेष: राष्ट्रीय विज्ञान दिवस और विज्ञान की कविता मुकुल सरल | 28 Feb 2021 नज़रिया साहित्य-संस्कृति विज्ञान भारत राजनीति आज राष्ट्रीय विज्ञान दिवस है और इतवार भी तो क्यों न आज ‘इतवार की कविता’ में विज्ञान से ही जुड़ी कविताओं के बारे में बात की जाए। ऐसा सोचते ही मुझे सबसे पहले चकबस्त याद आए। राष्ट्रीय विज्ञान दिवस आज राष्ट्रीय विज्ञान दिवस है, तो आज ‘इतवार की कविता’ में विज्ञान से ही जुड़ी किसी कविता को पढ़ा जाना चाहिए। हालांकि कवि-शायर अपने कहन, अपनी रचना में अपनी कल्पना, अपने जज़्बात और एहसास से काम लेता है लेकिन कभी भी जीवन के सच और विज्ञान का निषेध नहीं करता। इसके उलट वह ज्ञान-विज्ञान के गूढ़ रहस्यों को बहुत आसान शब्दों और अर्थों में भी प्रकट कर देता है। कभी-कभी कोई एक दोहा, चौपाई या शेर एक सूत्र रूप में प्रकट हो जाता है। जैसे जीवन या जीवन गति या कहें कि शरीर विज्ञान को 19वीं सदी का शायर किस ख़बसूरती से एक शेर में समेट देता है। वह कहता है- ज़िंदगी क्या है अनासिर में ज़ुहूर-ए-तरतीब मौत क्या है इन्हीं अज्ज़ा का परेशाँ होना जी हां, यह बृज नारायण चकबस्त का मशहूर शे...
" चुनाव पर कुछ लाइन :"...✍️ कौन जात हो भाई? दलित है' साब ! नहीं मतलब किसमें आते हो ? आपकी गाली में आते हैं गंदी नाली में आते हैं और अलग की हुई थाली में आते हैं साब! नहीं मुझे लगा हिंदू में आते हो। आता हूँ न साब ! पर आपके चुनाव में क्या खाते हो भाई ? जो एक दलित खाता है साब ! नहीं मतलब क्या-क्या खाते हो? आपसे मार खाता हूँ कर्ज का भार खाता है और तंगी में नून तो कभी अचार खाता हूँ साब ! नही मुझे लगा कि मूर्गा खाते हो ! खाता हूँ न साब ! पर आपके चुनाव में। क्या पिते होभाई ? जो एक दलित पीता है साब ! नहीं मतलब क्या-क्या पीने हो ? छूआ हुल का गम टूटे अरमानों का दम और नंगी आंखों से देखा गया सारा भरम साब ! नहीं मुझे लगा शराब पीते हो। पीता हूँ न साब ! पर आपने चुनाव में। क्या मिला है भाई ? जो एक दलितों को मिलता है साब ! नहीं मतलब क्या -क्या मिला है ? जिल्लत भरी जिंदगी आपकी धोई हुई गंदगी और...
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